आपको शायद ही पता होगा कि इन 20 चीजों की खोज भारत में ही हुई है।



खोज कई तरह की होती हैं। लेकिन कोई भी खोज मामूली नहीं होती। ऐसी ही दुनिया में कई खोजें हैं, जिनका श्रेय हम भारतीयों को जाता है। लेकिन सायद ही आप ये बात जानते होंगे। आज हम आपको ऐसे ही कुछ खास खोजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए। कई खोजों ने तो हमारी डेली रुटीन की लाइफ को आसान बना दिया। ऐसी ही कुछ खोजों की लिस्ट हम आपको बताने जा रहे हैं-

1. डायमंड रिंग

पुरी दुनिया जानती है कि 18 सेंचुरी में ब्राजील में हीरे की माइंस की खोज हुई थी। लेकिन उससे पहले हीरे का एक मात्र स्रोत पूरी दुनिया में भारत था। भारत में 5000 साल पहले हीरों की खदानों की खोज हुई थी।

Source

2. टॉयलेट फ्लश

टॉयलेट फ्लश की खोज दुनिया में सिंधु घाटी सभ्यती के ‌समय ही हो गया था। सिंधु घाटी सभ्यता अपने समय की सबसे विकसित सभ्यता थी। इन्हीं के समय में  खोज किया गया टॉयलेट फ्लश आज हर घर में मिल जाएगा।

Source

3. बाइनरी कोड

बाइनरी कोड की खोज 200 ईसा पूर्व में पिंगला नाम के वैज्ञानिक ने की थी। यह भारत के पुराने गणितज्ञ और छन्द:शास्त्र के रचियता हैं। यह भरात के प्रमुख विद्वान पाणिनी के छोटे भाई भी हैं।

Source

4. इंक

कई प्राचीन संस्कृतियों और सभ्यताओं ने अपने-अपने सुविधा के अनुसार लिखने के लिए इंक तैयार किया। पुराने भारत में उपयोग में लाये जाने वाले इंक में कार्बन पिगमेंट का इस्तेमाल किया जाता था। इसी इंक का इस्तेमाल आज के जमाने में काफी किया जाता है। चौथी शताब्दी पूर्व पेन जैसे प्वाइंटेड नीडल के साथ इंक का इस्तेमाल आम बात थी।

Source

5. स्टील और मेटल वर्क

पुराने समय में भारत धातु की गुणवत्ता के आधार पर भारत दुनिया में नम्बर वन था। उच्च गुणवत्ता वाली स्टील का उत्पादन दो हजार साल पहले पश्चिम में हो चुका था। धातु विज्ञान में सबसे बड़ी उपलब्धि seamless celestial globe की है, जिसका अ‌विष्कार कश्मीर में किया गया था।

Source

6. फाइबर ऑप्टिक्स

फॉर्च्यून पत्रिका के ‘सात गुमनाम हीरो’ में से एक डॉ नरिंदर सिंह केपेनी ने फाइबर ऑप्टिंक्स की खोज की थी। डॉ सिंह ने फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में काफी काम किया है,जिसके कारण इन्हें फाइबर ऑप्टिक्स के पिता के रुप में जाना जाता है।

Source

7. बटन

कपड़ों में इस्तेमाल किए जाने वाले बटन का सबसे पहले उपयोग मोहनजोदड़ो में किया गया था। वो भी सजावट के तौर पर न कि कपड़ों के लिए। ये 2000 ईसा पूर्व सिंधु घाटी की सभ्यता में उपयोग किया गया था।

Source

8. शतरंज

आपको मालुम है विश्वानाथन आनंद शतरंज के खेल के मास्टर क्यों हैं? क्योंकि ये हम भारतीयों का गेम है तो मास्टर भी हम ही ना होंगे। अरे सच में… दुनिया में ऐसा माना जाता है कि शतरंज की खोज छठीं सदी में भारत में हुई थी। इसका पुराना नाम चतुरंग था।

Source

9. रुलर

1500 ईसा पूर्व से पहले सिंधु घाटी सभ्यता में रुलर का इस्तेमाल किया जाता है। हाथी दांत से बने रुलर की खोज खुदाई के दौरान हुई थी। इस रुलर से उस समय के शासकों को डेसीमल सबडीविजन का पूरी सटीकता से पता करने में काफी मदद मिली।

Source

10. शेम्पू

शेम्पू ‘चांपो’ शब्द से बना है। इसे 1762 के आसपास मुगल साम्राज्य के दौरान बंगाल के नवाब सिर का मसाज करने के उपयोग में लाया करते थे। यह पिछले कुछ सालों में शेम्पू के तौर पर विकसित हो गया।

Source

11. सांप-सीढ़ी

सांप-सीढ़ी के खेल का अविष्कार भारत में नैतिकता के खेल के तौर पर हुआ था। बाद में यह पूरे इंगलैंड में फैल गया। बाद में इसे 1943 में मिल्टन ब्राडली ने खेल के अगुआ तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका में पेश किया।

Source

12. कपड़े (कपास की खेती)

इमेजिन करो कि अगर कपड़े की खोज नहीं हुई होती तो आज का जमाना कैसा होता? इसलिए किसी ने सही ही कहा कि अब तक की बेस्ट खोज कपड़ा है। और आपको मालुम है इसकी खोज कहां हुई थी सबसे पहले? हमारे भारत में। पुराने जमाने में युनानी लोग जानवर की खाल को पहनने के लिए इस्तेमाल करते थे। जबकि भारतीय चौथी से पांचवीं शताब्दी में ही कपास की खेती करने लगे थे। धीरे-धीरे पूरी दुनिया में इसका उपयोग होने लगा।

Source

13. फाइबोनैची नम्बर

इन नम्बरों का सबसे पहले उपयोग भारत के हेमचंद्र, गोपाल और विराहंका द्वारा किया गया था। इन नम्बरों की खोज पिंगला के लिखने से पहले ही हो गई थी।

14. डेसीमल सिस्टम, क्वाडरेटिक फॉर्मूला और शून्य

सातवीं शताब्दी ईस्वी में ब्रह्मगुप्ता ने क्वाडरेटिक इक्वेशन को सॉल्व करने के लिए एक सामान्य से फॉर्मूला की खोज की थी। डेसीमल सिस्टम जो अरेबिक न्यूमेरिक सिस्टम का मूल है, का विकास पहली से 6वीं सदी में भारत में हुआ था।

Source

15. ताश के पत्ते

ताश के पत्तों के की खोज भारत में हुई थी। इसे शुरुआत में यहां क्रीडा-पतरम के नाम से जाना जाता है।

16. मोतियाबिंद ऑपरेशन

मोतियाबिंद का ऑपरेशन अगर आज कारगार न होता तो आज दुनिया के कम से कम एक तिहाई लोग रात में देख नहीं पाते। इस खोज के लिए तो पूरी दुनिया भारत को अब तक थैेक्स बोलती है। क्योंकि इसके ऑपरेशन की खोज भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक सुश्रुत ने की थी। भारत से इस ऑपरेशन का ज्ञान चीन में फैला। एक समय बहुत से युनानी इस ऑपरेशन को कराने भारत आए और इस ऑपरेशन का रहस्य जानकर वापस गए।

Source

17. चांद पर पानी

दुनिया को सबसे पहले इसरो के चंद्रयान-1 ने सबसे पहले बताया था कि चंद्रमा सूखा नहीं है। आज भी चांद के पानी ( लूनर वाटर) के लिए पूरी दुनिया में चंद्रयान को क्रेडिट दिया जाता है।

Source

18. रेडियो/वायरलेस कम्यूनिकेशन

हम सब जानते हैं कि वायरलेस टेलीग्राफी के लिए मार्कोनी को 1909 में फिजिक्स का नोबेल प्राइज मिला था। लेकिन इससे पहले 1895 में जगदीश चंद्र बसु ने कम्यूनिकेशन के लिए रेडियो वेब्स का पहला पब्लिक डेमोंसट्रेशन किया था। जिसके दो साल बाद ऐसा ही पब्लिक डेमोंसट्रेशन मार्कोनी ने इंगलैंड में किया।

Source

19. पूर्वनिर्मित घर और मूवेबल स्ट्रक्चर

16वीं शताब्दी के मुगल भारत में अकबर के शासनकाल के दौरान पूर्वनिर्मित घरों और मूवेबल स्ट्रक्चर का अविष्कार हुआ था।

Source

20.प्लास्टिक सर्जरी

सच में, इसकी खोज भारत में ही हुई थी। 2000 ईसा पूर्व तक इसे भारत में उपयोग में लाया जाता था जिसके बाद यह दूसरे देशों में भी उपयोग में लाया जाने लगा।

Source

ऐसी अन्य दूसरी खोजों के बारे में आपको पता चले तो हमें जरूर बताएं। हमें भी पता चलता है तो हम भी आपको बताएंगे।





Add a Comment

comments

Related Articles

More Articles