एेसे होते थे पुराने जमाने में, फिल्म के लिए अभिनेत्रियों के ऑडिशन…



कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं। पहले भी सूरज पूरब से उगता था और अब भी। इसी तरह पहले भी फिल्मों के लिए अभिनेत्रियों से ऑडिशन के वक्त सबकुछ करवाया जाता था और अब भी। अगर विश्वास नहीं होता तो 1951 के ये फोटोज़ देखिए, जो ये बताने के लिए काफी है कि फिल्मों की लाइन लड़कियों के लिए न पहले अच्छी थी और अभी का हाल तो सबकोई जानते ही हैं।  ये तस्वीरें Life Magazine के फोटो जर्नलिस्ट 'जेम्स बुरके' ने तब खींची थीं, जब डायरेक्टर अब्दुल राशिद करदार अपनी फ़िल्म के लिए एक भारतीय व एक विदेशी लड़की का ऑडिशन ले रहे थे। तो देखिए  'जेम्स बुरके' की ये फोटोज़-

1. मायानगरी का हिस्सा बनने के लिए, ऑडिशन के लिए आई ये लड़कियां…।

2. जरा चलकर तो दिखाओ।

क्योंकि अभिनेत्रियों की चाल काफी मायने रखती है।

3. एक को बाहर भेज दिया गया।

पर्सनल ऑडिशन होगा…

4. शायद इस लड़की को कुछ सलाह की जरूरत रही होगी।

5. ये सलाह दी गई।

6. अब सर आगे क्या करना है?

लड़की शायद यही पूछ रही होगी।

7. ये साड़ी पहन कर तोे दिखाओ।

8. आपके ही सामने पहन लूं क्या? एेसा शायद ये सोची होगी…!!

9. हां, इसमें शर्माने वाली क्या बात है! एेसा अब्दुल राशिद करदार ने आंखों-आंखों में ही बोल दिया होगा।

10. तुम बेकार का इतना शर्मा रही थी। देखो, कितनी सुंदर लग रही हो। 

11. अब दूसरी का पर्सनल ऑडिशन।

12. तुम तो साड़ी पहनकर दिखाने में नहीं शर्माओगी?

13. नहीं सर। साड़ी पहनना तो मेरा फेवरेट काम है।

एेसा शायद इसने कहा होगा, और तुरंत पहन लिया होगा।

14. आप दोनों बेस्ट हो। मैं आपको कॉल करता हूं।

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इन तस्वीरों से तो आपको पता चल गया होगा कि, ऑडिशन कैसे होते थे, और अभी का हाल तो आपको पता ही होगा। ये है मायानगरी की माया।

 





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